बालपाठ – श्रीमन्नारायण कौन है ?

श्री: श्रीमते शठकोपाये नमः श्रीमते रामानुजाये नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः

बालपाठ

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आण्डाळ दादी पराशर और व्यास को साथ में श्रीरंगम मंदिर ले जाती है |

व्यास:  वाह  दादी, यह एक विशाल मंदिर है | हमने इससे पहले इतना बड़ा मंदिर नहीं देखा । हमने ऐसे विशाल महलों में रहने वाले राजाओं के बारे में सुना है। क्या हम एक ही राजा के दर्शन करने जा रहे हैं?

आण्डाळ दादी: हां, हम सभी के राजा, श्रीरंगराज को देखने जा रहे हैं| श्रीरंगराज (श्री रंगम के राजा), श्रीरंगम में उन्हें प्यार के साथ पेरिय पेरुमाळ और नम्पेरुमाळ (हमारे प्रभु) कहते हैं| भगवान् श्रीमन्नारायण शेष नारायण पर अर्धशायी स्थिति में आराम करते हुए अपनी सर्वोच्चता और स्वामित्व को उजागर करते हैं| वह अपने भक्तों की प्रतीक्षा करते है और जब भक्त उनसे मिलने जाते हैं तो उन्हें आशीर्वाद प्रदान करते है| जबकि नम्पेरुमाळ सुलभता (सौलभ्य) दर्शाते है, अर्थात् जो आसानी से प्राप्य है, वह भगवान अपने भक्तों की कठिनाइयों को समझते हैं, जो उन तक जाने में सक्षम न हो | इसलिए वह उन्हें अपने ब्रह्म-उत्सव (सावरी / जुलूस) (पुरप्पाडु) के भाग में दर्शन देते हैं। श्रीरंगम में लगभग सालभर, नम्पेरुमाळ अपने भक्तों को दर्शन देते हैं और उनको आशीर्वाद देते हैं।

पराशर : दादी, हमने सोचा कि श्रीमन्नारायण श्रीवैकुण्ठधाम में रहते है, लेकिन वह यहाँ भी है … यह कैसे

आण्डाळ दादी : हाँ पराशर, जो आपने सुना वह सही है। पेरूमाळ (श्रीमन्नारायण) वैकुण्ठ में हैं और वह यहां हमारे साथ भी हैं। मुझे यकीन है कि आपने जल के विभिन्न रूपों के बारे में सुना होगा : तरल, भाप और बर्फ | इसी तरह श्रीमन्नारायण के पांच रूप हैं, वे पररूप (श्री वैकुण्ठ में भगवान का रूप), व्यूहरूप (भगवान विष्णु क्षीरसागर के रूप में), विभेद/विभाव रूप (राम, कृष्ण, मत्स्य आदि के रूप में अवतार), सर्वज्ञ (भगवान ब्रह्माण्ड के प्रत्येक कण में निवास करते है) और मंदिरों में दिव्य मंगल विग्रह (अर्चाविग्रह) के रूप में रहते हैं। श्रीमन्नारायण भगवान जी ने श्रीरंगम में दिव्य मूर्ति रूप में उपस्थित हैं। अवतार का मतलब है नीचे उतरना या अवरोहण करना। जैसा कि मैंने आपको पहले बताया था, हम इस दुनिया में हर किसी की भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं। श्रीमन्नारायण भगवान हमारी प्रार्थनाओं के उत्तर स्वरूप में यहां पधारे है । हम सभी के प्रति भगवान् को अत्यन्त प्रीति है और हमारे साथ रहने के लिए पसंद करते हैं, यह भी एक कारण है कि भगवान श्री रंगनाथ के रूप में हमारे साथ यहाँ रहते है।

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इस पवित्र स्थल मे निवास करने वाले भगवान् का सन्दर्शन और पूजा कर, दादी ने व्यास और पराशर सहित प्रथान किया ।

व्यास: दादीजी, हमने आपसे उनके बारे में सुनने के बाद, उन्हें पसंद करना शुरू कर दिया है । दादी, इसके अलावा, वह हमारे जैसे दिखते है|

आण्डाळ दादी : वह न सिर्फ हम में से एक जैसे दिखते है, अपितु वह भी हम जैसे ही रहें है। विभेद (विभव) रूप में, उन्होंने हमारे साथ रहने के लिए अपने सर्वोच्च श्रीवैकुण्ठ छोड़ दिया और भगवान, श्री राम और कृष्ण के रूप में अवतार लिया और हमारी तऱह ही रहें। हम में से बहुत से लोग श्री राम या श्री कृष्ण को पसंद करते हैं, इसलिए उन्होनें हमारे साथ पेरिय पेरुमाळ रूप में कृष्ण के रूप में बने रहने का फैसला किया और नाम श्रीमन्नारायण के रूप में श्री राम के रूप में जाने का फैसला किया। पेरिय पेरुमाळ हमेशा एक गहरे विचार में बैठते हुए देखा जाते है, अपने भक्तों के बारे में सोच रहे हैं और श्रीमान नारायण हमेशा हमारे बीच में हैं, अपने भक्तों द्वारा दिखाए प्रेम का आनंद लेते हैं।

सभी अपने घर पहुंचते हैं।

व्यास और पराशर : ठीक है दादी, हम अब खेल के मैदान जा रहे हैं |

आण्डाळ दादी : बच्चों ध्यान से खेलना और याद रहें कि आप अपने मित्रों के सङ्गत मे जितना संभव हो उतना श्रीमन्नारायण के विषय पर अवश्य चर्चा करें ।

अडियेन् रोमेश चंदर रामानुजन दासन्

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