Monthly Archives: December 2017

Learn upadhESa raththina mAlai (உபதேச ரத்தின மாலை)

SrI:  SrImathE SatakOpAya nama:  SrImathE rAmAnujAya nama:  SrImath varavaramunayE nama:

mamunigal-srirangammaNavALa mAmunigaL – SrIrangam

Author – maNavALa mAmunigaL

mUlam (text) – thamizh

Santhai class schedule, joining details, full audio recordings (classes, simple explanations (speeches) etc) – http://pillai.koyil.org/index.php/2017/06/dhivya-prabandham-santhai-recordings/

Santhai (Learning) classes (ஸந்தை வகுப்புகள்)

Steps (Click the links to download the MP3 files and listen)

Part 1 – thaniyan and pAsurams 1 to 37
1 – word-by-word (பதம் பிரித்து)
2 – One line (ஒரு வரி)
3 – Two lines (இரண்டு வரிகள்)
4 – Full pAsuram (முழு பாசுரம்)
Part 2 – pAsurams 38 to 73 and additional pAsuram
1 – word-by-word (பதம் பிரித்து)
2 – One line (ஒரு வரி)
3 – Two lines (இரண்டு வரிகள்)
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Meanings (அர்த்தங்கள்)

Lectures (in thamizh) (Click the links to download the MP3 files and listen)

Introduction (அறிமுகம்)
thaniyan and first 3 pAsurams
pAsurams 4 to 13
pAsurams 14 to 20
pAsurams 21 to 26
pAsurams 27 to 37
pAsurams 38 to 40
pAsurams 41 to 47
pAsurams 48 to 49
pAsuram 50
pAsurams 51 to 52
pAsurams 53 to 59
pAsurams 60 to 64
pAsurams 65 to 70
pAsurams 71 to 73 and concluding pAsuram of eRumbi appA

vyAkyAnams (commentaries)English Translation

Recital (சேவாகால முறை) Full rendering

Learn thiruppaLLiyezhuchchi (திருப்பள்ளியெழுச்சி)

SrI:  SrImathE SatakOpAya nama:  SrImathE rAmAnujAya nama:  SrImath varavaramunayE nama:

periya perumAL (srIranganAthan) – SrIrangam thondaradipodi-azhwar-mandangudithoNdaradippodi AzhwAr – thirumaNdangudi

Author – thoNdaradippodi AzhwAr

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Santhai (Learning) classes (ஸந்தை வகுப்புகள்)

Steps (Click the links to download the MP3 files and listen)

1 – word-by-word (பதம் பிரித்து)
2 – One line (ஒரு வரி)
3 – Two lines (இரண்டு வரிகள்)
4 – Full pAsuram (முழு பாசுரம்)

Meanings (அர்த்தங்கள்)

Lectures (in thamizh) (Click the links to download the MP3 files and listen)

thiruppaLLiyezhuchchi

vyAkyAnams (commentaries)

Recital (சேவாகால முறை)

Full Rendering

Learn mumukshuppadi (முமுக்ஷுப்படி)

SrI:  SrImathE SatakOpAya nama:  SrImathE rAmAnujAya nama:  SrImath varavaramunayE nama:

Untitled3nArAyaNa rishi, nara rishi – badhrikASramam piLLai lOkAchAryar, maNavALa mAmunigaL – SrIperumbUthUr

mumukshuppadi is one of the fundamental granthams which should be learned by every SrIvaishNava who has undergone pancha samskAram (samASrayaNam), with proper guidance. This must be heard and learned after undergoing pancha samskAram only.

Author – piLLai lOkAchAryar

Santhai class schedule, joining details, full audio recordings (classes, simple explanations (speeches) etc) – http://pillai.koyil.org/index.php/2017/06/dhivya-prabandham-santhai-recordings/

Santhai (Learning) classes (ஸந்தை வகுப்புகள்)

Steps (Click the links to download the MP3 files and listen)

Part 1 – thaniyans and sUthrams 1 to 51

1 – word-by-word (பதம் பிரித்து)
2 – Full sUthram (முழு ஸூத்ரம்)
3 – Multiple sUthrams

Part 2 – sUthrams 52 to 115

1 – word-by-word (பதம் பிரித்து)
2 – Full sUthram (முழு ஸூத்ரம்)
3 – Multiple sUthrams

Part 3 – sUthrams 116 to 184

1 – word-by-word (பதம் பிரித்து)
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Reference Material

(Click the links to see the content and files)

Lectures (in thamizh) (Click the links to download the MP3 files and listen)

Simple explanation based on maNavALa mAmunigaL‘s vyAkyAnam

Introduction (அறிமுகம்)

thaniyans (தனியன்கள்) 

sUthrams (ஸூத்ரங்கள்)

thirumanthra prakaraNam

sUthrams 1 to 4
sUthrams 5 to 7
sUthrams 8 to 21
sUthrams 22 to 30
sUthrams 31 to 39
sUthrams 40 to 51
sUthrams 52 to 57
sUthrams 58 to 63
sUthrams 64 to 74
sUthrams 75 to 85
sUthrams 86 to 94
sUthrams 95 to 101
sUthrams 102 to 111
sUthrams 102 to 111
thirumanthram summary

dhvaya prakaraNam

Introduction (அறிமுகம்)

sUthram 116
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बालपाठ – तिरुमऴिशै आऴ्वार (भक्तिसार मुनि)

श्री:  श्रीमते शठकोपाये नमः  श्रीमते रामानुजाये नमः  श्रीमद्वरवरमुनये नमः

बालपाठ

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thirumazhisaiazhwar

आण्डाल दादी तिरुवेळ्ळरै मंदिरके दर्शन के लिए पराशर और व्यास को साथ में ले जाती हैं । वे श्री रंगम के राजगोपुर के बाहर एक बस में बैठे हैं ।

पराशर: दादी, जबकि हम बस में हैं, क्या आप हमें चौथे आऴ्वार के बारे में बता सकते हैं?

आण्डाल दादी : ज़रूर, पराशर । मुझे हर्ष है कि आप यात्रा के दौरान आऴ्वार के दिव्य चरित्र के बारे में बात करना पसंद करते हैं।

पराशर और व्यास दादी के सामने मुस्कराए । बस श्री रंग से शुरू होता है ।

आण्डाल दादी : चतुर्थ (चौथे) आऴ्वार तिरूमऴिशै आऴ्वार है, जिन्हें प्यार से भक्तिसार कहा जाता था । आप श्री का प्रादुर्भाव थाई महीने के माघ नक्षत्र मे भार्गव मुनी और कणकांगी को चेन्नई के पास स्थित तिरूमऴिशै दिव्य क्षेत्र में हुआ । वह अकेले आऴ्वार थे जो इस दुनिया में सबसे लंबे समय तक जीवित रहे ।आप श्री लगभग ४७०० वर्षों तक इस पृथ्वी पर रहे ।

पराशर और व्यास (आश्चर्य में) : अपने जबड़े ड्रॉप कर पूछते हैं “४७०० साल “???

आण्डाल दादी : हाँ, पेयआऴ्वार से मिलने से पहले, उन्होने अलग-अलग धर्मों का अवलबन किया था ।

व्यास: ओह ! उनसे (पेयआऴ्वार से) मिलने के बाद क्या हुआ ?

आण्डाल दादी : पेयआऴ्वार ने उन्हें भगवान विष्णु के बारे में विस्तार से पढ़ाया और तिरूमऴिशै आऴ्वार को श्री वैष्णव संप्रदाय में वापस लाया.

बस छतरम बस स्टैंड पहुंच गया।

आण्डाल दादी : उनकी विशेष रुचि अन्तरयामी भगवान् (वह पेरुमाळ् जो हमारे अन्तरंग मे है) के प्रति थी और (उनका) कुंभकोणम के अारावमुदन् अर्चा स्वरूप के प्रति इतना अनुरक्त थे कि पेरुमाळ् ने उनका नाम आऴ्वार के नाम से बदल दिया और वह (दानों) अारावमुदन् आऴ्वार और तिरूमऴिशै पिरान् के नाम से प्रसिद्ध हुए ।

पराशर: वाह, दादी ऐसा लगता है कि वह पेरुमाळ् के अत्यनत सन्निकट थे ।

आण्डाल दादी : हाँ, वह पेरुमाळ् के अत्यनत सन्निकट थे थे । एक गांव में, जब वह यात्रा कर रहे थे, (उन्होने) उस गांव के मंदिर का दर्शन किया । पेरुमाळ् उनको बहुत प्यार करते थे, जिस दिशा में आऴ्वार चल रहे थे भगवान् विष्णु भी उस दिशा की ओर बढ़ना शुरू कर दिये । इसी तरह, भागवत-प्रेमी (आऴ्वार-प्रेमी) अारावमुदन् भगवान् जो आऴ्वार के प्रति अनुरक्त थे (कि), आऴ्वार की विशेष प्रार्थना को विनम्रतापूर्वक स्वीकार कर, भगवान् स्वशय्यावस्था से उठना शुरू कर दिए जब आऴ्वार के अलविदा होने की बात भगवान् ने सुनी ।

पराशर और व्यास (की आँखें विस्मय में बाहर आये) और पूछते हैं “फिर क्या हुआ दादी माँ?”

आण्डाल दादी : आऴ्वार चौंक गए और भगवान् विष्णु से अनुरोध किए कि वे स्वशय्यावस्था स्थिति में वापस आजाए । भगवान विष्णु दुविधा में थे और इसलिए वह अब भी अर्ध शयित स्थिति में है ।

व्यास: ओह दादी ! यह बहुत अच्छी है । एक दिन हमें भी (उन) भगवान् विष्णु के दर्शन के लिये जाना चाहिए ।

आण्डाल दादी : निश्चित रूप से, हम कुछ समय पर्यन्त वहां जायेंगे । वह लंबे समय तक वहाँ रहते है । वह अपने सभी कार्यों को कावेरी नदी में फेंककर केवल २ प्रबन्धों को प्रतिधारित करते है – तिरूच्छन्द-विरुत्तम् और नान्मुगन्-तिरुवन्दादि । उसके बाद वह अंततः परमपद वापस लौट आये और भगवान् विष्णु को परमपद में सनातन रूप से सेवा-संलग्न हुए ।

बस तिरुवेळ्ळरै तक पहुंचता है । वे मंदिर में प्रवेश करते हैं और माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु का दर्शन करते हैं।

अडियेन् रोमेश चंदर रामानुजन दासन

आधार – http://pillai.koyil.org/index.php/2014/11/beginners-guide-thirumazhisai-azhwar/

प्रमेय (लक्ष्य) – http://koyil.org
प्रमाण (शास्त्र) – http://granthams.koyil.org
प्रमाता (आचार्य) – http://acharyas.koyil.org
श्रीवैष्णव शिक्षा/बालकों का पोर्टल – http://pillai.koyil.org