बालपाठ – श्रीमन्नारायण का दिव्य अर्चा विग्रह और गुण

श्री: श्रीमते शठकोपाये नमः श्रीमते रामानुजाये नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः

बालपाठ

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व्यास और पराशर अपने दोस्तों के साथ खेलने के बाद, आण्डाल दादी के घर वापस आकर उन्होंने देखा कि आण्डाल दादी एक पात्र में फल, फूल और सूखे फल की व्यवस्था कर रही है ।

व्यास: दादी, आप किसके लिए इन फलों और फूलों की व्यवस्था कर रहे हैं ?

आण्डाल दादी: व्यास, अब श्री रंगनाथ कि सवारी का समय है और वह हमें रास्ते पर मिलेंगे । जब कोई हमारे मेहमान, विशेष रूप से बड़ों के रूप में हमारे पास आते है, तो उनका ध्यान रखना हमारा परम कर्तव्य है । वह भी जब एक भव्य शाश्वत राजा हमें मिलते हैं, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका अच्छी तरह से ध्यान रखा जाए ।

पराशर: ओह निश्चित रूप से दादी, उसके बाद, मैं भगवान श्री रंगनाथ को फल और फूल अर्पण करूँगा जब वह आते हैं।

आण्डाल दादी: पराशर आओ, ये बहुत अच्छा है, उनके आगमन के लिये प्रवेश द्वार पर प्रतीक्षा करें।

नम्पेरुमाऴ (श्री रंगनाथ) आण्डाल दादी के घर के सामने आते है । श्री रंगनाथ को फलों और फूलों अर्पण करते हुए पराशर को प्रकाश मिलता है |

पराशर: दादी, वह अपने बाएं हाथ में क्या धरे है?

दायें हाथ में चक्र (सुदर्शन), बाएं हाथ में शंख (शंख), कंधे से ऊपर, दाहिना-हाथ अभय मुद्रा स्थिति में (भगवान् का दाहिना हाथ सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार रहता है), और उनके कंधे से नीचे बाएं हाथ में गदा रहती है |

आण्डाल दादी: पराशर, वह अपने बाएं हाथ में गदा धरे है । श्री रंगनाथ का दिव्य अर्चाविग्रह चतुर्भुजी है अर्थात् उनके चार हाथ हैं । बाएं हाथ वाले कंधे पर, वह शंख धरे है और दाहिने हाथ वाले कंधे से ऊपर एक सुदर्शन चक्र को धरे है । वह अपने हथियारों से हमें सूचित करते है, कि वे हमेशा हमारी देखभाल करने के लिए और हमारी कठिनाइयों को नष्ट करने के लिए तत्पर हैं ।

व्यास: दादी,दाहिना हाथ क्या दर्शाता है?

दाहिना-हाथ अभय मुद्रा स्थिति में-भगवान का दाहिना हाथ सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार रहता है |

दाहिना-हाथ अभय मुद्रा स्थिति में -भगवान का दाहिना हाथ सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार रहता है |

आण्डाल दादी: यह एक अच्छा सवाल है । उनका दाहिना हाथ प्यारपूर्वक हमारे ओर निर्देशित है अर्थात् “मैं तुम्हारी देखभाल करने के लिए यहां हूं, इसलिए भय न करो” और हम सभी उनकी प्यारभरी पर्वरिश को जानने के लिए भी निर्देशित है । वैसे ही जैसे एक गाय अपने बछड़े की ओर दौड़ति है, जब बछड़े को उसके माँ कि जरूरत होती है, भले ही इससे पूर्व बछड़े का असद्व्यवहार हो ।

लंबा मुकुट (वर्चस्व) और मुस्कुराता हुआ चेहरा (सादगी)

व्यास: ठीक है, दादी फिर, फिर, उनके सिर पर वह क्या रहता है?

आण्डाल दादी: व्यास यह एक मुकुट है, इससे पता चलता है कि वह इस संपूर्ण ब्रम्हांड के मालिक है।

पराशर: दादी, मुकुट बहुत अच्छा लगता है, यह अपने आराध्य के चेहरे पर सटीक है ।

आण्डाल दादी: हाँ, वह सबसे प्यारा चेहरा है| वह हमेशा हमारे साथ खुश रहते है । जब भी वह तुम्हारे जैसे बच्चों के बीच है, वह और भी खुश रहते है |

पराशर: हाँ, दादी, मैंने उसे बहुत करीब से देखा था । मैं भी उन्हें मुस्कुराता देख सकता था और भगवान् के चरण कमलों को भी करीब से देखा है।

आण्डाल दादी: ओह, यह अच्छा है पराशर | हम आमतौर पर निविदा और सुंदर प्रकृति के कारण उनके चरणों को चरण कमल कहते हैं | उनके मुस्कुराते चेहरे से यह संकेत मिलता है कि वह आसानी से हमारे साथ रहने के लिए खुशी से श्री वैकुण्ठ से उतरे हैं | उनके चरण कमल इतने दृढ़ता से पीठ (कमल के फूलों का आधार) पर स्थित हैं, जिसका अर्थ है कि वह हमारे लिए नीचे आये और वह हमें कभी नहीं छोड़ेंगे | आज तो हमने उनके अर्चा विग्रह रूप के में कुछ शुभ गुणों को देखा है, अर्थात् वात्सल्य (मातृभावना – वह हमें बचाने में अपना हाथ दिखाते है), स्वामित्व (सर्वोच्चता – लंबा मुकुट), सौशील्य (हमारे साथ स्वतंत्र रूप से मिश्रण-अपने सुंदर चेहरे में वर्तमान मुस्कान) और सौलभ्य (सुलभता या सुगमता) – उनके चरण कमल को पकड़ना आसान है) ।

जैसे ही भगवान् की सवारी, व्यास और पराशर के पास से गुजरता है, वे खड़े होकर भगवान् की सवारी को भक्ति विभोर हो कर देख रहे थे ।

अडियेन् रोमेश चंदर रामानुजन दासन्

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